क्या देश में सच में होने वाला है तेल संकट क्या आ सकती है सच में कोई बड़ी मुसीबत प्रधानमंत्री के भाषण से हो रही है आशंका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई 2026 को तेलंगाना के सिकंदराबाद और हैदराबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जितने कम हो उतना ईंधन का उपयोग करो और तो और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने को कहा
इससे आम जनता तो आम जनता विपक्ष भी हैरान और निशाना साधते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री की नाकामी सच में क्या प्रधानमंत्री नाकाम है आइए इस लेख से समझते हैं
West Asia (Middle East) संकट और उसका भारत पर असर
यह युद्ध अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से शुरू हुआ था जो की बहुत लंबा खिंच गया और जवाबी कार्यवाही में ईरान ने भी अपने तेवर दिखाये जिससे आसपास के पड़ोसी देशों में तेल संकट गहराने लगा और फिलहाल अभी होर्मुज पर नौसेना की ना की बंदी से और तनाव बढ़ गए हैं जिससे बहुत बड़ी संकट आने की संभावनाएं लग रही है इससे कई क्षेत्रों में भारी गिरावट और सामान महंगी होने की आशंका जताई जा रही है
तेल की बढ़ती कीमतें
विदेशी मुद्रा बचाने की जरूरत
देशवासियों से संयम और एकजुट रहने की अपील
Fuel Saving (पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील)
Public transport इस्तेमाल करने को कहा
Carpooling और Electric Vehicles को बढ़ावा
Work From Home फिर से अपनाने का सुझाव
विदेश यात्रा और Gold खरीद कम करने की बात
एक साल तक गैर-जरूरी foreign travel टालने की सलाह
Gold खरीद कम करने को कहा ताकि foreign exchange बचे
‘Viksit Bharat’ और Meditation/Mindfulness
क्या इन सब चीजों के लिए हमें पहले से तैयार नहीं होना चाहिए था क्या यह हमारे प्रधानमंत्री जी की गलती है या
या हम जनता की देश को सभी मुसीबत से नहीं बचने के लिए तैयार रखना चाहिए था और खुद प्रधानमंत्री को सभी चीजों की व्यवस्थाएं करनी चाहिए थी और अन्य मित्र देशों से हमें अच्छे वार्तालाप और अच्छे रिश्ते बनाए रखनी चाहिए थे चाहे वह ईरान ही क्यों ना हो
मिडिल ईस्ट की तनाव में भारत की जीडीपी में कितना प्रभाव पड़ेगा
भारत की जीडीपी अभी रिसेंटली 0.3 से 0.6 तक प्रभावित हो चुका है यह तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से हुआ भारत अपना 80 से 85% तेल आयात से लाता है और पड़ोसी देशों में तनाव के कारण यह दिन हमें देखना पड़ रहा है
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का प्रभाव भारत की समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
लगभग 40 से अधिक कार्गो जहाज, जो भारत की ओर आ रहे थे, वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति के कारण प्रभावित हुए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, 11 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं, जबकि 13 भारतीय जहाज अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं।
इस स्थिति का भारत के आयात क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ रहा है। कच्चे तेल, LPG, LNG और उर्वरकों की आपूर्ति में देरी की आशंका बढ़ गई है, जिससे देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। साथ ही, तेल की कीमतों में वृद्धि की संभावना भी बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के कारण बीमा और लॉजिस्टिक्स लागत (Freight Cost) में भी काफी वृद्धि हुई है।
भारत सरकार लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रही है तथा भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में बनी हुई है।
क्या एल ओ पी राहुल गांधी जी की बातें सच हो रही हैं उन्होंने कुछ दिनों पहले कहा था कि पश्चिम बंगाल असम और अन्य राज्यों में चुनाव के बाद हमारे देश में पेट्रोल डीजल और अन्य कुछ जरूरी सामानों के दाम बढ़ने वाले हैं और ऐसा होता दिख भी रहा है
ऐसे कई मामलों पर राहुल गांधी जी ने पहले से ही देश को जिताया था जो बाद में सच साबित हुआ
